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Janoon...
इस तरह दिया है जिन्दगी ने हमारा साथ..., जैसे कोई निबाह रहा हो रकीब से...!!!
चाहत ...
मैने तो उसके लिए,
यहाँ तक दुआएं
की ...
.
.
मेरी तरह से कोई,
.
उसे चाहता भी हो ...!!!
उसकी खातिर ...
उसने कुछ माँगा
भी
तो माँगी जुदाई...
.
.
.
.
और हम थे कि हमें
इन्कार करना ना आया...!!!
शब्दों की गहराई ...
उसने कहा था,
अपना बनाकर छौड़ेंगे...
.
.
.
.
.
फिर
हुआ भी यूं,
उसने अपना बनाकर छौड़ दिया ...!
हकीकत ...
इस झूठी नगरी
में
हमने यही हमेशा देखा है... !
.
.
.
सच्ची बात बताने वाले
कुछ कुछ पागल होते हैं... !
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feelings...
रंगो में कभी राख को घोला नहीं करते...
मेरी जिन्दगी...
दामन-ए-ज़ीस्त में अब
कुछ भी नहीं है बाक़ी...
मौत आई तो,
यकीनन उसे धोखा होगा...
अहसास...
उसे मेरी चुप्पी भी रुला देगी........................., जिसे गुफ्तगू में कमाल था...
हमारी दास्ताँ शहर की दीवारों पे चिपकी है......
दुनिया हमें ढूडेंगी कल पुराने इश्तिहारों में...
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तन्हा
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सूरज
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