चाहत ...




मैने तो उसके लिए,


यहाँ तक दुआएं की ...
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मेरी तरह से कोई,


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उसे चाहता भी हो ...!!!









उसकी खातिर ...




उसने कुछ माँगा भी


तो माँगी जुदाई...

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और हम थे कि हमें



इन्कार करना ना आया...!!!

शब्दों की गहराई ...






उसने कहा था,


अपना बनाकर छौड़ेंगे...

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फिर हुआ भी यूं,


उसने अपना बनाकर छौड़ दिया ...!



हकीकत ...



इस झूठी नगरी में
हमने यही हमेशा देखा है... !
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सच्‍ची बात बताने वाले
कुछ कुछ पागल होते हैं... !